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देश के भीतर का आतंकवाद खतरे की घंटी

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फ़्रांस में आई एस आई एस के आतंकवादी हमले के बाद पूरी दुनियां में आतंकवाद को लेकर चर्चा छिड़ी हुयी है लोग आई एस आई एस की ताकत को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।रूस और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के हमले के बाद भी यह संगठन झुकता नजर नहीं आ रहा है और अमेरिका के व्हाईट हाउस में घुसकर हमला करनें की चेतावनी दे रहा है। पूरी दुनियां के समस्त देश भी मिलकर इस संगठन की शक्ति के आगे कमजोर दिख रहे हैं। आई एस आई एस केवल इराक और सीरिया तक ही सीमित नहीं है आई एस आई एस आज विश्व के हर देश में अपना अच्छा खासा बजूद बना चुका है और दुनियां अभी तक इससे अनजान है।जिस तरह दुनियाँ के सभी देश आतंक के खिलाफ एक जुट हुए हैं लगता है ऐसे ही दुनियां भर में पनप रहे सभी आतंकी संगठन भी इस झंडे के नीचे एक हो गए हैं और इनका सामूहिक संगठन ही आई एस आई एस है।
     भारत दुनियां भर में आतंकियों का सबसे सुरक्षित पनाहगार है आज भले ही आप इस बात को सिरे से नकार दें पर सच यही है।यहाँ की लचर कानून व्यवस्था यहाँ आतंकियों को भयमुक्त बाताबरण  उपलब्ध करवाती है। पिछले कुछ दिनों से एन आई ए ने भारत में तेज़ी से कार्यवाही की है और उनकी कार्यवाही के नतीजे ना सिर्फ चौकाने बाले हैं वरन् भयावह भी हैं और भारत के लिए खतरे के संकेत भी। भारत अपने नजदीक चल रहे कई प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों का सक्रिय केंद्र बनता जा रहा है।आतंकवाद के खिलाफ भारत में केंद्र और राज्य के बीच सक्रिय सहभागिता और तालमेल ना होने से भारत में आतंकवादी बड़े आराम से घूम रहे हैं।
      भारत में बांग्लादेश के घुसपैठियों की समस्या एक प्रमुख समस्या है हिन्दुस्तान सरकार के बोर्डर मैनेजमेण्ट टास्क फोर्स की वर्ष कि 2000 रिपोर्ट के अनुसार 1.5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर चुके हैं और लगभग तीन लाख प्रतिवर्ष घुसपैठ कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल 54 लाख, असम 40 लाख तक घुसपैठिये हो सकते हैं। असम में 1971-1991 में हिन्दुओ की जनसंख्या बढ़ोत्तरी का अनुपात 42.89 है जबकि मुस्लिम जनंसख्या में इससे 35% अधिक 77.42% की दर से बढोतरी हुई। ये लोग वहां स्थायी वोट बैंक बनकर सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।और सरकारें भी इन्हें अपने राजनैतिक हितों की दृष्टि से लाभ दे रहीं हैं।इन घुसपैठियों के साथ आतंवादियों की भारी घुसपैठ से इनकार नहीं किया जा सकता है।
    आतंकवाद में उत्तर प्रदेश का नाम अभी चर्चा में नहीं रहा है पर यह प्रदेश आतंकबादी गतिविधियों में अग्रणी भूमिका में नजर आ रहा है अभी कुछ दिन पहले मेरठ और आजमगढ़ से आतंकवादियों की गिरफ़्तारी से यहाँ हलचल मची हुयी है। खुफिया एजेंसी के पास पुख्ता खबर है कि इंडियन मुजाहिद्दीन के सदस्य आई एस आई एस के लिए यहाँ नेटवर्क का काम कर रहे हैं।इनके निशाने पर सिमी की आतंकी गतिविधियों के लिए बदनाम रहे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपद हैं जिनमे शामली, वागपत, सहारनपुर, रामपुर, मुरादाबाद, हापुड़, मेरठ,आगरा,मथुरा आदि प्रमुख हैं।इसके अलावा पश्चिमी उत्तरप्रदेश में हरकत उल अंसार, हिज्बुल मुजाहिद्दीन, जैश ए मोहम्बद, लश्कर ए तैयबा जैसे संगठन के स्लीपिंग मोड्यूल की जानकारी मिली है। आई एस आई एस के इंटरनेट अकाउंट को लाइक करने बालों में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश के हैं।
   पिछले कुछ दिनों में हुयी आतंकी गिरफ़्तारी चौकाने वाली है। मेरठ और आजमगढ़ से गिरफ्तार हुए आतंकियों ने एन आई ए को कई चौकाने बाले तथ्यों से अवगत कराया है।दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा और सेना के रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल की पुत्री आई एस आई एस ज्वाइन करने की फ़िराक में थी जो अब एन आई ए की कस्टडी में है।मुम्बई के कल्याण के चार युवक आई एस आई एस ज्वाइन करने इराक के रास्ते सीरिया भाग गए थे जिनमे एक आरिफ मजीद वापस आ गया है और एन आई ए की शिकंजे में है। कोलकत्ता के मेहँदी विश्वास को आई एस आई एस के ट्विटर अकाउंट को हैंडल करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इन सब घटनाओं से साफ संकेत मिलता है कि देश में सैकड़ों युवक आई एस आई एस में शामिल हो चुके हैं।
      मेरठ में गिरफ्तार पाकिस्तानी आई एस आई के वेतन पर नियुक्त आतंकी एज़ाज़ ने सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियो को बताया कि वह कुछ वर्ष पूर्व ही नेपाल के रास्ते भारत दाखिल हुआ था और यहाँ आकर उसने शादी कर ली। दो वर्ष में ही उसके पास यहाँ का राशनकार्ड और आधार प्रमाणपत्र था।यानि अब वह पूरी तरह भारतीय नागरिक बन चूका था अगर वह भारतीय सुरक्षा एजेंसी के हत्थे ना चढ़ता तो इसी देश का नागरिक बन कर वर्षों तक भारत की खुफिया जानकारी आतंकियों को मुहैया कराता रहता। यहाँ विडम्बना यह भी है कि एक आम नागरिक अपने राशनकार्ड के लिए भटकता है और एक आतंकी एक साल में भारत मे रहने के लिए सभी आवश्यक पहचान पत्र हांसिल कर लेता है और वोट डालने का अधिकार भी।यही आतंकी जब समाज में रहकर अराजकता फैलाता है तो नेता हिन्दू मुस्लिम बाद फैलाकर अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेंकते हैं।
      आई एस आई एस के आतंक के तरीके को अभी लोग समझ नहीं पा रहे है लोगों को लगता है कि सीरिया से आतंकी भारत आएंगे और हमला करेगें,पर यह लोगों की ग़लतफ़हमी है आई एस आई एस अपने सहयोगी आतंकी संगठनों  की मदद से कई देशों में अच्छा खासा नेटवर्क तैयार कर चुका है और प्रत्येक देश में हजारों लोग इस संगठन में जुड़ चुके हैं। यह संगठन इन्ही युवकों की मदद में कभी भी किसी भी देश में आतंकी हमला करवाने की ताकत रखता है। इंटरनेट की मदद से नए आतंकियों की भर्ती की जा रही है उन्हें आर्थिक सुविधाएँ मुहैया करायी जा रहीं है। इंटरनेट पर ही दिशानिर्देश मिल रहे हैं और नेटवर्क मजबूत किया जा रहा है।
     हालांकि पूरा विश्व मानता है कि भारत आतंकबाद से निपटने में सक्षम है पर केवल इस भरोसे हम हाँथ पर हाँथ रखे नहीं बैठ सकते हैं सभी राज्यों को अपने यहाँ आतंकी गतिविधियों को रडार पर रखना होगा और केंद्र के साथ पूरी तत्परता और जिम्मेदारी से आतंक से निपटने को प्रभावी कार्ययोजना बनानी होगी।प्रदेश की किसी छोटी घटना को ये आतंकी सम्बेदनशील बनाकर धार्मिक युद्ध करा सकते हैं।राज्यों को ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों को वोट या धार्मिक चश्मे से ना देखकर त्वरित सख्त कार्यवाही करनी जरुरी है। देश के नागरिकों को भी अपने आसपास के हर संदिग्ध की जानकारी रखनी चाहिए और संदिग्ध की सूचना बिना किसी भय और डर के सुरक्षा एजेंसी को देनी चाहिए। आतंकवाद केवल एक दिन या एक महीने की समस्या नहीं है इसलिए हर वक्त और हमेशा इसके खिलाफ सक्रिय लड़ाई जारी रहनी चाहिए।। हम इमरजेंसी लगने और आतंकवादी हमला होने का इंतज़ार नहीं कर सकते।

Web Title : आतंकबाद से अनजान है हम



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